Asthma Ka Gharelu ilaj – अस्थमा (दमा) का घरेलू इलाज

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asthma ka gharelu ilaj

Asthma Ka Gharelu ilaj अस्थमा श्वसन और फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है।जिसे हम दमा के नाम से भी जानते हैं। श्वसन नलिकाएँ फेफड़ों द्वारा हवा को अंदर बाहर करती है। अस्थमा होने की वजह से इन श्वसन नलिकाओं की भीतरी सतह पर सूजन ओर संकुचन हो जाता है, जिस कारण फेफड़ों में हवा (वायु) का प्रवाह अच्छे से नहीं हो पाता है। जिसकी वजह से साँस लेने में बहुत दिक़्क़त होती है। व्यक्ति को सही ढंग से ऑक्सीजन नहीं मिल पाती जितनी उसे मिलनी चाहिये। ऐसी गंभीर स्थिती में व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। अस्थमा की अभी ऐसी कोई दवा नहीं बनी जिससे इसे जड़ से ख़त्म किया जा सके। अभी फ़िलहाल इसको सही देखभाल से ही कंट्रोल किया जा सकता है। Asthma ka gharelu ilaj के लिए रोगियों को अपनी देखभाल करनी बहुत ही आवश्यक है.

Asthma Ka Gharelu ilaj

अस्थमा का इलाज करने से पहले, अस्थमा होने का कारण और उसके लक्षण के बारे में पता होना आवश्यक है.

Asthma hone ka karan – अस्थमा (दमा) होने का कारण:

अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जिसका अभी कोई इलाज नहीं है किंतु इसकी समय से देखभाल कर कंट्रोल करना सम्भव है। आइए जानते है इसके मुख्य कारण

1. एलर्जी:- ये एक ऐसी समस्या है जो कभी समय ओर जगह देखकर नहीं आती, ये किसी को भी और कभी भी हो सकती है। एलर्जी होने पर इसका प्रभाव नाक, कान, गले, फेफड़ों और त्वचा पर सबसे अधिक पड़ता है। इसके अधिक प्रभाव से त्वचा और नाक की एलर्जी अधिक बढ़ जाती है इसी के चलते अस्थमा की समस्या भी पैदा हो सकती है।

2. धूम्रपान:- धूम्रपान करना सेहत के लिए बहुत ही अधिक हानिकारक होता है। ऐसी बहुत सी बीमारियाँ है जो धूम्रपान की वजह से होती हैं। उनमें से अस्थमा भी एक गंभीर बीमारी है। जो सिर्फ़ धूम्रपान करने से ही नहीं बल्कि धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के साथ रहने से भी हो सकती है। गर्भावस्था के समय धूम्रपान करना या धूम्रपान से होने वाले धुएँ से भी बच्चे को दमा (अस्थमा) होने का ख़तरा अधिक बढ़ जाता है।

3. वंशानुगत:-

अस्थमा भी एक वंशानुगत बीमारी है। वंशानुगत बीमारियाँ ऐसी बीमारियाँ होती हैं जो बड़े-बूढ़ों से स्वत ही मिल जाती है। अगर परिवार में कोई बड़े-बुज़ुर्ग या माँ बाप को किसी बीमारी से प्रभावित हैं तो उनके बच्चों पर इस बीमारी का असर पड़ सकता है। एक जैसे ही हार्मोन होने की वजह से बच्चों में भी उस बीमारी के होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है।

4. ख़राब जीवनशैली:- आज के समय में व्यक्ति काम काज में इतना ज़्यादा मग्न हो गया है उसे अपनी सेहत की कोई चिंता नहीं है। ख़राब खानपान, शारीरिक क्षमता में कमी, ओयलि फ़ूड्स अधिक खाना, ख़राब जीवनशैली के प्रमाण है। जिसकी वजह से दमा होने का ख़तरा अधिक बढ़ जाता है।

अधिक जंक फ़ूड खाने से, अधिक नमक खाने से भी अस्थमा होने का ख़तरा अधिक होता है।

Asthma ke Lakshan – अस्थमा के लक्षण

  • घबराहट होना, सीने में दर्द होना.
  • नाक से सांस लेने परेशानी होना
  • सांस अधिक फूलना, एक्सरसाइज करते वक्त और अन्य किसी गतिविधि के कारण
  • दमा के मरीज को कफ की शिकायत, बदबूदार कफ
  • शुरूआती समय में खांसी, सरसराहट और सांस उखड़ने के दौरे भी पड़ सकते हैं.
  • साँस लेने में अधिक परेशानी होने लगती है.
  • शरीर में खिचाव
  • साँस लेते समय रोगी को अधिक परेशानी होना, चेहरा अधिक लाल पड़ना
  • दमा रोगी को अधिक दौरे पड़ना

Asthma Diagnosis Test in Hindi – दमा के परिक्षण

1. स्पिरोमेटी :- इस जांच से व्यक्ति के सांस लेने की गति का परिक्षण करते हैं. यह एक सामान्य प्रकार का परिक्षण है. जो किसी भी क्लीनिक में हो सकता है. इस परिक्षण से सांस और ह्रदय रोग को पहचाना जा सकता है.

2. चेस्ट एक्सरे:- दमा की बीमारी होने पर चेस्ट एक्सरे करना अति आवश्यक है. चेस्ट एक्सरे से अस्थमा, को देखा तो नहीं जा सकता, लेकिन इससे सम्बंधित स्थितियां पहचानी जा सकती है.

3. ब्लड टेस्ट:- ब्लड टेस्ट से त्वचा में होने वाली एलर्जी के बारे में पता किया जा सकता है. इसलिए यह टेस्ट बहुत ही जरुरी है.

4. शारीरिक परिक्षण:- अस्थमा रोगी को शारीरिक परिक्षण कराना बहुत ही जरुरी है. जैसे चेस्ट की जांच करना, चेस्ट की घरघराहट से अस्थमा की गंभीरता को पहचाना जा सकता है.

5. पीक फ्लो:- इस परीक्षण के द्वारा व्यक्ति के फेफड़ों से पता किया जा सकता है कि वह कितनी तेजी से और आसानी से सांस छोड़ रहा है. अस्थमा रोगी को तेजी से सांस छोड़ना बहुत जरुरी होता है.

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Asthma Ka Gharelu ilaj – दमा (अस्थमा) का घरेलू इलाज

अस्थमा का अभी ऐसा कोई इलाज नहीं है जिससे इसे जड़ से ख़त्म किया जा सके. आइये जानते है कुछ घरेलू इलाज के बारे में जो दमा के रोगियों के लिए बहुत ही लाभकारी होता है.

  1. अस्थमा के रोगी के लिए सबसे बड़ा इलाज उसकी देखभाल है. विटामिन बी और सी भी दमा के रोगियों के लिए लाभकारी है. हरी सब्जियां, संतरे का जूस आदि.

2. तुलसी के पत्ते दमा रोगी को बहुत ही फायदा पहुंचाते हैं. तुलसी के पत्तों को साफ़ करके उसमें थोड़ी सी काली मिर्च छिड़कर खाने से अस्थमा नियंत्रित रहता है. रोगी को आराम मिलता है और उसको रात में नींद अच्छे से आती है.

3. अजवाइन बहुत से रोगों में दवाई का काम करती है. ये दमा के लिए भी फायदेमंद है. अजवाइन को गर्म पानी में डालकर स्टीम लेने से दमा नियंत्रित रहता है.

4. Asthma ka gharelu ilaj के लिए लहसुन

लहसुन दमा के रोगियों के लिए बहुत ही लाभकारी है. लहसुन की चाय या दूध में लहसुन डालकर दूध को अच्छे से उबाल कर पीने से दमा रोगी को बहुत राहत मिलती है.

5. सेलेनियम फेफड़ों में हुई सूजन को कम करने में बहुत ही कारगर है. सेलेनियम मॉस में अधिक पाया जाता है. सी फ़ूड, मीट, चिकन में सेलेनियम अधिक मात्रा में पाया जाता है.

6. एक गिलास पानी में मुट्ठीभर सहजन की पत्तियां मिलाकर करीब 5 मिनट तक उबालें। मिश्रण को ठंडा होने दें, इसमें थोड़ा सा नमक, काली मिर्च, और नींबू की थोड़ी सी मात्रा मिलाकर इन सबको अच्छे से मिक्स कर लें.

7. ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें बिटामिन बी की मात्रा अधिक होती है. वह अस्थमैटिक्स को अटैक से बचाती है. दाल और हरी सब्जियां इस रोग में बहुत ही लाभकारी होती हैं.

8. हरी गोभी में बिटामिन सी की मात्रा अधिक पायी जाती है जो दमा के मरीजो के लिए बहुत ही फायदेमंद है.

9. साइट्स फ़ूड जैसे संतरे का जूस, दमा के रोगियों के लिए बहुत ही लाभकारी है.

Asthma ka gharelu ilaj बहुत ही लाभदायक है. दमा के रोगी इन घरेलू इलाज की मदद से अस्थमा की समस्या को कण्ट्रोल कर सकते हैं. ये एक ऐसी समस्या है जिससे व्यक्ति रात दिन परेशानी से घिरा रहता है. लेकिन इसको नियंत्रित रखने से समस्या कम की जा सकती है. इस पोस्ट को शेयर जरुर करे. 

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